Monday, September 3, 2018

Jain muni tarun sagar maharaj biography

कडवे प्रवचन करता के रुप में जाना जाने वाले जैन मुनि तरुण सागर को पीलिया बीमारी हो जाने के कारण दिनांक 1 सितम्बर 2018 को नई दिल्ली में निधन हुयी .
मुनि तरुण सागर एक भारतीय  दिगम्बर भिघु और एक कडवे प्रवचनकर्ता लेखक के रूप में प्रसिध्दी प्राप्त किये थे।
तरुण सागर जैन धर्म के मूनी थे .तरुण सागर की मृत्यु  51 साल की उम्र में हुयी  तरुण सागर का अंतिम संस्कार गाजियाबाद के मुरादनगर में स्थित तरुन्सागरम में किया गया।
मुनि तरुण सागर भ्रस्टाचार,रुढ़िवादी और हिंसा के विरोधी थे जैन धर्म के आलावा अन्य धर्म के लोग भी इनके प्रवचन को सुनते थे
tarun sagar maharaj
Tarun sagar maharaj ji



तरुण सागर की जीवनी –

मुनि तरुण सागर का जन्म 26 जून 1967 को ग्राम गुह्नी जिला दमोह राज्य मध्यप्रदेश में हुआ था।

जैन मुनि तरुण सागर का असली नाम पवन कुमार जैन था इनके माता का नाम श्रीमति शांतिबाई जैन और पिता का नाम प्रताप जैन था .
14 साल की उम्र में तरुण सागर ने घर छोड़ कर संयासी जीवन में आ गये थे मुनि तरुण सागर क्रन्तिकारी संत के नाम से भी प्रसिद्ध थे.

इसके आलावा मुनि तरुण सागर कडवे वचन के नाम से एक सीरीज की शुरुआत की
जिसके कारण लोग अच्छे से जानने लगे .
तरुण सागर राजनीतिक नेताओं को भी मिल चुके हैं

तरुण सागर के अनमोल वचन –


  • अगर इन्सान को जीतना है तो दिल से जीतिए तलवार के बल पर आप जीत तो हासिल कर लेंगे लेकिन उसके प्यार को कभी पा नहीं सकेंगे .
  • हँसने का गुण सिर्फ मनुष्य को मिला है कुत्ते को नहीं इसलिए आप हमेशा मुस्कुराते रहिये क्योंकि कुत्ते चाहकर भी कभी मुस्कुरा नहीं सकते.
  • प्रयास करते हो फिर भी सफलता नहीं मिलती तो निराश होने की जरूरत नहीं है पुनः प्रयास कीजिये अक दिन सफलता जरुर मिलेगी
  • माँ बाप होने के कारण अपने बच्चे को खूब पढ़ाना लिखाना और पढ़ा लिखा कर खूब लायक बनाना मगर इतना लायक भी मत बना देना की वह कल तुम्हे ही नालायक समझने लगे .
  • लक्ष्मी पूजा के काबिल तो है लेकिन भरोसे के काबिल कतई नहीं है लक्ष्मी की पूजा तो करना मगर लक्ष्मी पर भरोसा मत करना और भगवान की पूजा भले ही मत करना लेकिन भगवान पर भरोसा हल-हाल में रखना .
  • भले ही लड़ लेना झगड़ लेना,पिट जाना,पिट देना मगर बोलचाल बंद मत करना क्योंकि बोल चाल के बंद होते ही सुलह के सरे दरवाजे बंद हो जाते हैं
  • कभी तुम्हारे माँ बाप तुम्हे गाली देते हैं तो बुरा मत मानना बल्कि ये सोचना गलती होने पर माँ बाप नहीं गाली देंगे तो कौन गाली देगा और कभी छोटे से कोई गलती हो जाये तो ये सोचकर उन्हें माफ़ कर देना की गलतियाँ छोटे नहीं करेंगे तो और कौन करेगा .
  • डाक्टर और गुरु के सामने कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए क्योंकि डाक्टर के सामने झूठ बोलने में रोग का इलाज नहीं होगा और  गुरु के सामने झूठ बोलने पर  पाप का प्रयिश्चित नहीं होगा .डाक्टर और गुरु के सामने एकदम सहज और सरल भाव से पेश आएये आप कितने भी होशियार क्यों न हो आप इन दोनों के सामने होशियार बनने की कोशिश मत कीजिये.

तरुण मुनि सागर को मिले पुरस्कार-

मुनि तरुण सागर को कर्नाटक में क्रन्तिकारी का शीर्षक दिया गया और मध्यप्रदेश,गुजरात,कर्नाटक और महारास्ट्र में राज्य अतिथि के रूप में घोषित किया गया.
तरुण सागर कड़वे प्रवचन करता के रूप में प्रकाशित हुए इनका एक किताब भी प्रकाशित किया गया जिसका वजन 2000 किलो ग्राम है. 




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